आत्मविश्वास
-प्रोफेसर श्यामलाल उपाध्याय
खोया हो विश्वास आपने
सभी जनों का अपने आप ।
घोर तमिस्त्रा में भी रख लें,
कैसे मुक्ति मिले अभिशाप ।।
लांछित कितने हुए विश्व में
राम, कृष्ण से रामानुज ।
सत्पथ मर्यादा की रक्षा
त्याग आसुरी वृत्ति मनुज ।।
सत्य न्यास पर चल कर तुम
अपने कर्त्तव्य निभाओगे ।
देश बनेगा, स्वर्ग कहीं
जिसको तुम सोच न पाओगे ।।
-नियति निसर्ग
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