रविवार, 21 अक्टूबर 2012


आत्मविश्वास 


   -प्रोफेसर श्यामलाल उपाध्याय

खोया हो विश्वास आपने
सभी जनों का अपने आप ।
घोर तमिस्त्रा में भी रख लें,
कैसे मुक्ति मिले अभिशाप ।।

लांछित कितने हुए विश्व में
राम, कृष्ण से रामानुज ।
सत्पथ मर्यादा की रक्षा
त्याग आसुरी वृत्ति मनुज ।।

सत्य न्यास पर चल कर तुम
अपने कर्त्तव्य निभाओगे ।
देश बनेगा, स्वर्ग कहीं
जिसको तुम सोच न पाओगे ।।

              -नियति निसर्ग

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