बुधवार, 17 अक्टूबर 2012


नयी सदी पर  

    -प्रोफेसर श्यामलाल उपाध्याय
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उठे, विश्व उत्थान श्रृंग पर, हाथों लिए विविध उद्योग ।
कम्प्यूटर, जैविक-संरचना, चाहे हों, कितने प्रौद्योग ।।
ऊर्जाएं बन, प्राण रक्षिका, समता के वैभव उपजाएं ।
जग से कटुता, वैर मिटें और शांति प्रेम सरसाएं ।।
कोई कहीं न भूखा होए, न ही कहीं कोई बेराह ।
छोटे-बड़े सुखी सब होएं, सभी चलें, बस अपनी राह ।।
ऐसे ही हम समझ-बूझ से, काज करें, निज सारे तोल ।
श्रम से अपना नाता जोड़ें, नयी सदी का सच्चा मोल।।
                              -(नियति निक्षेप)

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