तितीर्षा
भाव की प्रत्यंच धर
कार्मुक सजीला कर्म का
ज्ञान का शर सिद्ध हो
अनिरुद्ध हो पथ व्यक्ति का ।
डूब जाएँ सिन्धु में
सागर-महासागर सभी
पर तितीर्षा लोक जीवन की
शमित होगी नहीं ।
डांड़ छूटे, नाव डूबे
पर कभी डूबा न दुर्बल
बाहु का पतवार हो
पतवार का हो बाहु सम्बल ।
-नियति न्यास
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