मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012


युव सेनानी


शक्तिधर देश कोई
शत्रु बन दल-बल
युद्ध की भयानक 
विभीषिका ले उतरे । 
भूमि पर भयानक 
दुकाल आ पसर जाय  
अथवा विभीषक 
प्रदूषण रोग धमके ।

देश का अजस्र शक्ति 
धारित युव सेनानी
हाथ पर हाथ धरे 
बैठा रह जाएगा । 
निर्भय रण दुन्दुभी से 
वैरी दस्यु सम जान
अतुलित पराक्रम में 
शीघ्र जुट जाएगा । 

रुकने का नाम कभी
जान क्या सका है वह 
लड़कर वैरी से 
उसके छक्के 
छुडाएगा । 

छोड़ेगा अजस्र शक्ति का 
वह अमोघ अस्त्र 
भय से भयानक 
कपाली बन जाएगा । 
सारी शत्रु सेना का
दल-बल मान मर्दित कर
यश-ख्याति अर्जित
देश-भक्त कहलायेगा । 
किंचित दिशा में वह
असफल अपने को जान 
जीवित मृतक बन 
नाक न कटाएगा ।   

बनकर तूफ़ान मेघ
चिरचिरी की ज्वाला बन
सबको मिटाकर वह 
आप मिट जायेगा । 
अथवा स्वातंत्र्य वेदिका पर
प्राण अर्पित कर
देही बिन देह हो 
सदेह स्वर्ग जाएगा । 
         -नियति न्यास 

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