युव सेनानी
शक्तिधर देश कोई
शत्रु बन दल-बल
युद्ध की भयानक
विभीषिका ले उतरे ।
भूमि पर भयानक
दुकाल आ पसर जाय
अथवा विभीषक
प्रदूषण रोग धमके ।
देश का अजस्र शक्ति
धारित युव सेनानी
हाथ पर हाथ धरे
बैठा रह जाएगा ।
निर्भय रण दुन्दुभी से
वैरी दस्यु सम जान
अतुलित पराक्रम में
शीघ्र जुट जाएगा ।
रुकने का नाम कभी
जान क्या सका है वह
लड़कर वैरी से
उसके छक्के
छुडाएगा ।
छोड़ेगा अजस्र शक्ति का
वह अमोघ अस्त्र
भय से भयानक
कपाली बन जाएगा ।
सारी शत्रु सेना का
दल-बल मान मर्दित कर
यश-ख्याति अर्जित
देश-भक्त कहलायेगा ।
किंचित दिशा में वह
असफल अपने को जान
जीवित मृतक बन
नाक न कटाएगा ।
बनकर तूफ़ान मेघ
चिरचिरी की ज्वाला बन
सबको मिटाकर वह
आप मिट जायेगा ।
अथवा स्वातंत्र्य वेदिका पर
प्राण अर्पित कर
देही बिन देह हो
सदेह स्वर्ग जाएगा ।
-नियति न्यास
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें