मैं सोचता हूं- कविता जीवन है / जो व्यक्ति को जीना सिखाती/ सिखाती अनुशासन, कराती कर्म/ चराती धर्म, निराती न्याय/ और देती, लोक-परलोक/ स्वर्ग-मर्त्य, मुक्ति-निर्वाण/
मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012
शोध
अनेक शोधों के पश्चात् शोध मिश्रण निर्मित मैं एक मल्टी विटाप्लेक्स । चाँदी के चमकते चिप्पडों में बन्द केमिस्ट की शाला के शेल्फ़ पर पड़ी उत्सुक जानने को अपनी एक्सपायरी डेट । -नियति न्यास
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