पथ-प्रदर्शक
मूल्य के आख्यानकों को कंठगत कर
तत्त्वमसि के ऋचा-सूत्रों को पचाया
शुभ्र भगवा श्वेत के परिधान में
पा गया पद श्री विभूषित आर्य का
मैं पथ-प्रदर्शक ।
कर्म की निरपेक्षता के स्वांग भर
विश्व के उत्पात का मैं मूल वाहक
द्वेष-ईर्ष्या-कलह के विस्फोट से
बन गया हिरोशिमा यह विश्व
मैं पथ प्रदर्शक ।
पर न पाया जगत का वह सार
जिससे कर सकूँ अभिमान निज पर
लोक सम्मत संहिताओं से पराजित
पड़ा मैं भू-व्योम मध्य त्रिशंकु सा
मैं पथ प्रदर्शक ।
-नियति न्यास
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