भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
-प्रोफेसर श्यामलाल उपाध्याय
हे जनमानस के भारतेन्दु !
हिन्दी-भाषा के सूत्रधार ।
तदभव भाषा, क्या मुहावरे,
कहावतों में फूट रहे, प्राणों के स्वर,
गद्य फूंकते प्राण, पूर्वी ब्रज के पुट,
निखर उठता स्वरूप।
पुरातत्त्व, साहित्य और इतिहास कला में,
सदा निरुपित तथ्य और वे भाववेग ।
कविता, नाटक अथवा निबन्ध
जीवन चरित्र हो, उपन्यास
सबमें युगबोध, प्रवर्तन, रूप युक्त -
कवि वचन सुधा और चन्द्र चन्द्रिका
नारी प्रबोधिनी ।
राष्ट्र प्रेम-प्रतिमूर्त्ति, भक्ति के मानक कवि,
युग-संस्थापक, जनक हिन्दी भाषा के ।
ये संचित अवदान तुम्हारे,
पथदर्शक जन-जन के ।
हे जनमानस के भारतेन्दू !
हिन्दी भाषा के सूत्रधार ।।
शत-शत प्रणाम ।
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