स्वागत, नयी सदी !
तेरे मिस यों मिटे, तमिस्त्रा, जड़ता, दैन्य, अशिक्षा ।
सुख-सुविधा-सम्पन्न जगत हो, प्रेम, अहिंसा, दीक्षा ।।
कोटर में अभाव पल रहा, साधक साध्य विहीन ।
निरुद्देश्य कातर जन बैठा, अति पीड़ित, अति दीन ।।
वह अतीत के सारे रोदन, वर्तमान में ढोता ।
है, भविष्य की आस लगाए, चिन्ताओं में खोता ।।
जन-मन-की भय-भीति भगे, जो पीड़ित विपदाओं से ।
नाचे, मन-मयूर उसका, युग-धर्म, कर्म-जीवन से ।।
नव शताब्दि की नयी प्रेरणा, सुख-समृद्धि सरसाएं ।
जाड्य, द्वेष, कालुष्य मिटे और शान्ति-प्रेम सरसाएं ।।
-नियति निक्षेप
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