!! मातृ-पितृ दिवस पर !!
माता-पिता के प्रति -
-श्यामलाल उपाध्याय
माता-पिता न भूलना, चाहे जग संसार ।
अगणित जो उपकार हैं, कभी न पाना पार ।।
पूजे देवी देवता, पूजी ऊंची भूम ।
तब तुझ सी मूरत मिली, नहीं अघाती चूम ।।
मातु-पिता के मन कहीं, कभी न जाना तोड़ ।
जग के सिरजनहार से, कभी न तू मुख मोड़ ।।
कण-कण ले मुख में दिये, बड़ा किया सो जान ।
अमृतदाता को कहीं, कभी न विष का दान ।।
लाड़ प्यार तुझसे किए, पूरी तेरी चाह ।
ऐसे स्नेही से कभी, सदा बनेगी राह ।।
चाहे कितने काम से, मिले जो कोटि हजार ।
अरब-खरब सब व्यर्थ हैं, पाई तूने हार ।।
तेरे भींगे स्थान पर, सोई कितने वर्ष ।
उसे और क्या चाहिए, पाया केवल हर्ष ।।
ऐसे स्नेहिल नेत्र हैं, आंसू से हों दूर ।
करना उसका है कभी, कहीं मनोरथ पूर ।
जिसने फूल बिछा दिए, स्नेहिल पाई राह ।
कभी न ऐसे प्रेम को, हो काटों की चाह ।।
धन दौलत देते सभी, कभी नहीं पितु-मात ।
परमपूज्य इनके चरण, कभी न करना घात ।।
सन्तति से सेवा कहीं, हों सन्तति सम भाव ।
जैसी करनी कर चला, होगी वैसी चाव ।।
-दोहा दर्पण से
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