अबलाओं की पुकार
-प्रो. श्यामलाल उपाध्याय
बहन-बेटियां बिलख रहीं हैं, भरी नींद सो रहा देश ।
भय-कातर ललनायें टूटीं, यह तुम तक संदेश ।।
समय आ गया, अब संसद को, आर्तनाद सुनना होगा ।
द्रौपदियों को विपदाओं से, मुक्त उन्हें करना होगा ।।
बचा नहीं सकते तो ले लो, रहा चूड़ियों का उपहार ।
सत्ता में तुम रह न सकोगे, हुई तुम्हारी कर्कश हार ।।
दुःशासन हैं शासन करते, सता-सताकर देते ताप ।
दामिनियां कड़केंगी ऊपर, सह लेना उनके परिताप ।।
अबलायें सबलायें होंगी, आग उगलनेवाली ।
नारी जग के आर्तनाद से, भस्मि शिखा बलने वाली ।।
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