मैं सोचता हूं- कविता जीवन है / जो व्यक्ति को जीना सिखाती/ सिखाती अनुशासन, कराती कर्म/ चराती धर्म, निराती न्याय/ और देती, लोक-परलोक/ स्वर्ग-मर्त्य, मुक्ति-निर्वाण/
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