प्रो. श्यामलाल उपाध्याय के प्रति ः
संस्कृति के पहरेदार नमन !
-डॉ. लक्ष्मीकान्त त्रिपाठी 'विमल'नम्रता सिन्धु उत्कर्ष शिखर, वाणी से झरते मधुर बैन ।
पग-पग पर स्नेहिल स्नेह मिले, हर कदम बिखेरे अमन चैन ।।
तुम सौम्य सरल निर्मल स्वभाव, करते भाषा का संवर्धन ।
तन मन वाणी से चिदाकाश को, ले समेटते श्रीवर्धन ।।
शब्दों के सक्षम शिल्पकार, जीवन्त सृजन उद्गार नमन ।
युगरत्न शलाकापुरुष प्रवर, साहित्य सिन्धु के ज्वार नमन ।।
सादगी तुम्हारी मान रही, निज कर्मठता अरमान रही ।
व्यक्तित्व उदात्त उत्कृष्ट प्रखर, तेरी वाणी वरदान रही ।।
लहरों से ले संकल्प शक्ति, तुम बढ़े सदा जीवनपथ पर ।
विश्वास सुदृढ़ चट्टानों सा, ज्यों बढ़े अंशुमाली नभ पर ।।
हे ! पुरुष प्रवर सरस्वती पुत्र, नर पुंगव बारम्बार नमन ।
सृष्टा-दृष्टा कविकर्मी को, युग-युग का शत-शत बार नमन ।।
क्रमशः......
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